करवा चौथ की शॉपिंग
करवा चौथ की शॉपिंग
सिया बालकनी में खड़ी होकर अपने पति को ऑफिस जाते हुए देख रही थी। सुबह की हल्की धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसने हाथ हिलाकर मुस्कुराते हुए बाय कहा। तभी साथ वाले फ्लैट की पड़ोसन अपनी बालकनी में आई और चहकते हुए बोली, "सिया, इधर देखो! मैंने तो करवा चौथ की शॉपिंग कर ली। मेरे पति ने मुझे कितनी सुंदर लाल साड़ी दिलवाई है। देखो, इसका बॉर्डर कितना प्यारा है। बस इसकी मैचिंग का चूड़ी सेट और नेकलेस लाना बाकी है। तुम क्या पहनोगी इस बार?"
सिया ने तारीफ में कहा, "बहुत सुंदर है, तुम पर बहुत जचेगी।" फिर बात को टालते हुए हंसकर कहा, "मैं? मैं पहन लूंगी कुछ भी। अलमारी में रखा कोई अच्छा सूट पहन लूंगी। नई साड़ी तो बहुत महंगी पड़ेगी।"
तभी उसकी एक और सहेली वहां आ गई और मजाक बनाते हुए बोली, "हमारे यहां तो हर साल नए कपड़े पहनते हैं करवा चौथ पर। साल भर का त्योहार है। साल में एक ही बार आता है। सही से तैयार होना चाहिए। तुम इंस्टाग्राम पर रील्स नहीं देखती? कितनी सुंदर-सुंदर तैयार होती हैं महिलाएं।"
सिया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "हां, वो तो है। देखती हूं, अभी कुछ सोचा नहीं है।" ऐसा कहकर उसने अपने फ्लैट का मुख्य दरवाजा अंदर से धीरे से बंद कर लिया।
बेटे के स्कूल और पति के ऑफिस जाने के बाद घर में शांति थी, पर सामान बेतरतीब फैला हुआ था। उसने रसोई में जाकर अपने लिए एक कप कॉफी बनाई और उसे लेकर बालकनी में आकर बैठ गई। कॉफी पीते हुए वह नीले आसमान को निहारने लगी और गहरी सोच में डूब गई।
अब मौसम ठंडा होने लगा है। सुबह-शाम की हवा में हल्की गुलाबी ठंडक है। क्वार का महीना वैसे भी त्योहारों की बरसात साथ लेकर आता है। नवरात्रि, दशहरा गए, अब करवा चौथ, फिर दीवाली।
वह सोचने लगी, सोशल मीडिया और फिल्मों ने करवा चौथ को कितना भव्य और महंगा बना दिया है। हर तरफ डिजाइनर लहंगे, डायमंड ज्वेलरी, महंगे पार्लर पैकेज और फोटोशूट के विज्ञापन। जैसे प्यार का सबूत इन्हीं चीजों से दिया जाएगा।
सिया ने कॉफी का घूंट लिया। हर बार नए कपड़े, , नई पायल... इस दिखावे के चक्कर में महीने का पूरा बजट गड़बड़ा जाता है। असल में करवा चौथ तो पति-पत्नी के समर्पण और प्यार का पर्व है। बाजारवाद ने इसे शॉपिंग का पर्व बना दिया है।
मन तो मेरा भी करता है कभी-कभी ये सब करने के लिए। पर मेरे पति तो बिल्कुल बोरिंग हैं, जरा भी फिल्मी नहीं। एक फोटो भी साथ में खिंचवाना उनके लिए भारी काम होता है।
उसने तय किया, चलो बाजार जाकर एक अच्छा सा सूट ले आऊंगी। बस हो गई मेरी करवा चौथ की शॉपिंग। शादी के पन्द्रह साल बाद तो रोज का एक दिन शांति से गुजर जाए, बिना किसी कलेश के, वो भी एक बहुत बड़ी उपलब्धि होती है।
शाम को पति ऑफिस से लौटे। सिया किचन में थी। पति ने चुपके से उसके कंधे पर हाथ रखा। सिया ने पलटकर देखा तो पति के हाथ में ताजे मोगरे का गजरा और एक छोटी सी थैली में गरम जलेबी थी।
पति थोड़े झेंपते हुए बोले, "वो... रास्ते में हलवाई की दुकान पर भीड़ देखी तो याद आया, तुम्हें करवा चौथ पर गरम जलेबी बहुत पसंद है। और ये गजरा... दुकान वाली ने कहा ताजा है। वो साड़ी... इस महीने बोनस नहीं मिला न, इसलिए..."
सिया की आंखें भर आईं। उसने गजरा बालों में लगाया। जलेबी की खुशबू पूरे घर में फैल गई। उसे लगा, पड़ोसन की महंगी साड़ी एक तरफ, और पति का यह बिना कहे समझ जाना एक तरफ।
उसने मुस्कुराते हुए कहा, "यही तो मेरी असली करवा चौथ की शॉपिंग है
।"
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली
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