आधुनिकता

 



लघु कथा- आधुनिकता / भाषा का पतन


ममता स्कूल से घर आ रही थी पढ़ाकर। रास्ते में उसने दो बच्चों को मारपीट करते देखा। यही 12-13 साल उम्र रही होगी। उसके अंदर गुरु का भाव जागा। उसने आगे बढ़कर बच्चों को अलग किया और प्रेम से रहने का संस्कार देने लगी। उनमें से एक बच्चा - "मैडम आप हम दोनों के बीच में मत बोलो, यह हमारा आपसी मामला है। आपका काम स्कूल में सिलेबस पूरा कराना है। ज्ञान मत दो हमें। अपने काम से काम रखो।" ममता अवाक सी खड़ी रह गई। भरी भीड़ में वह बच्चा उसके सम्मान की धज्जियां उड़ा गया। किसी ने कुछ कहना भी जरूरी न समझा। ममता ने खुद को संयत करते हुए कदम अपने घर की ओर बढ़ा दिए। दिमाग में विचारों का तूफान चल रहा था। आधुनिकता की कीमत समाज को ऐसे चुकानी पड़ रही है। यह आधुनिकता है अपने गुरु का अपमान। क्या है इनका भविष्य?


डॉ वंदना शर्मा नई 

दिल्ली 

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