Sunday, November 17, 2019

बाल कहानी १ - ची -ची

बाल कहानी १ - ची -ची
एक था चूहा। नाम था उसका ची -ची। एक दिन वो सुबह की सैर को जा रहा था। उसे एक पेड़ के नीचे कुछ चमकीला सा दिखाई दिया। वो दौड़कर पहुंचा वहां देखा एक सुन्दर लाल कपडा था। जो बहुत चमक रहा था। तभी वो ख़ुशी से उछला और बोला -"अरे वाह कितना सुन्दर कपडा है। इसकी तो मैं टोपी सिलवाऊंगा। शादी में जाऊंगा। सेल्फी लूंगा। गरम -गरम रसगुले खाऊंगा। वाऊ कितना मज़ा आएगा। युम्मी -यम्मी !ऐसा सोचकर उसने लाल कपडे को उठाया और उलट -पुलटकर देखने लगा। टोपी सिलाने के लिए चाहिय एक दरजी। ची -ची चूहा गया दर्जी के पास। पैसे तो थे नहीं उसके पास। दर्जी ने उसकी टोपी सिलने को मना कर दिया- "जाओ पहले पैसे लेकर आओ ,ऐसे नहीं सिलूँगा। " चूहा बहुत दुखी हुआ। वो कुछ सोचने लगा। उसे एक तरकीब सूझी। वो फिर से दर्जी के पास गया और बोला -" 
   पुलिस को बुलाऊंगा ,पिटाई करवाऊंगा 
   नहीं तो टोपी सिल दो भैया ,वरना जेल भिजवाऊंगा "
दर्जी डर जाता है। उसकी टोपी सिल देता है। टोपी पहनकर ची-ची चूहा बहुत खुश हुआ। उसने सोचा अगर इस टोपी में सितारे भी होते तो मजा आ जाता। चूहा गया सितारे लगवाने। पहले तो सितारे वाले ने मना कर दिया ,फिर चूहे ने उसे भी वही धमकी दी -
   पुलिस को बुलाऊंगा ,पिटाई करवाऊंगा 
   नहीं तो सितारे लगा  दो भैया ,वरना जेल भिजवाऊंगा "
सितारे वाला भी डरकर जल्दी से सितारे लगा देता है। सितारे वाली टोपी पहनकर चूहा बहुत खुश हुआ। सोचा चलो अब पार्टी में चलते हैं। चूहा पहुंचा मंडप में। लेकिन ये क्या ? यहाँ उसे एक दरवान ने रोक लिया। दरबान उसे अंदर न जाने दे। उसने फिर वही धमकी दी -
"    पुलिस को बुलाऊंगा ,पिटाई करवाऊंगा 
   नहीं तो अंदर जाने दो भैया ,वरना जेल भिजवाऊंगा "
दरबान भी डर जाता है। वो चूहे को अंदर जाने देता है। चूहा अपनी समझदारी पर बहुत खुश हुआ। वो इठलाकर अकड़कर चलने लगता है। कभी इधर फुदकता ,कभी उधर फुदकता ,शोर मचाता चूहा चला जा रहा था अपनी ही धुन में ,ख्वाबो को बुनता हुआ मन ही मन में। तभी अचानक उसका पैर फिसला ,जा गिरा वो नाली में। हुई उसकी बहुत जग -हंसाई और खिंचाई। टोपी भी गन्दी हो गयी नाली में। अपनी टोपी देख चूहा रोने लगा। तभी वहां आयी एक नन्ही चुहिया, बोली मत रो भैया। जो हो गया ,होने दो ,आंसू पोंछो ,हंसो तो ,यह लो खाओ रसमलाई। अब तो थोड़ा हंस दो भैया। 
आओ मिलकर करें ता -थैया ,ता -थैया। 

Saturday, September 14, 2019

कुछ ऐसी है ये मेरी दुनिया।

जब कभी इस बाहरी दुनिया से थक जाती हु मैं
या कभी होती हूँ ज़्यादा ही भावुक 
या होती हूँ दो -चार किन्ही स्वार्थी रिश्तो से 
जब मन चाहता है कुछ अलग करना 
पर कुछ समझ नहीं आता 
क्या सही क्या गलत 
जब घेरने लगती है मुझको निराशा 
जब खोजने लगती हूँ शून्य में कहीं अपना आकाश 
तो आशा की किरण जगाने ,खोलती हूँ 
मैं अपनी यादों की दुनिया को 
और देर तक खोयी रहती हूँ 
उन छोटी -छोटी बातों में 
जो कभी किसी कागज पर उकेरी थी 
कहीं कुछ छायाचित्र देखकर 
आती है होंठों पर मुस्कान 
शब्दों से सजी मेरी सृजन की दुनिया 
मेरे सपने ,मेरी संवेदनाएं 
दिखाती हैं मुझे एक नयी राह 
देती हैं मुझे नया जोश 
कुछ ऐसी है ये मेरी दुनिया। 

Thursday, September 12, 2019

ye teri aankhe jhukhi jhuki
ye tera chehra khila khila
badi kismat wala hai wo pyar tera jise mila

Wednesday, July 17, 2019

dr  vandna sharma

Thursday, July 4, 2019

आज शिल्प संग्रहालय जाने का अवसर प्राप्त हुआ. अद्भुत कला कौशल व् भारतीय संस्कृति को दर्शाता न जाने क्यों उपेक्षित महसूस करता है ,विदेशी तो बहुत आते है अवलोकन को लेकिन अपने ही देशवासी उपेक्षा करते है। शिल्प कला के अद्भुत अकल्पनीय ,दर्शन। कितनी विराट एवं महान कला संस्कृति है मेरे देश की। मुझे गर्व है इस देश में जन्म लिया।  मात्र २० रुपए के टिकिट पर चलचित्र (मूवी ) भी दिखाते हैं फ्री में उस पर सभी राज्यों की अद्भुत कलाकारी , प्राकृतिक हरियाली , कोयल की कूक , मिटटी की खुशबु ,प्राचीन गांव के दर्शन ,निशब्द हूँ  उस एहसास को बया करने में।  बहुत ही सूंदर एवं मनोहारी जगह। सभी देशवासियो से अनुरोध अपनी संस्कृति को अनदेखा न करें , एक बार ज़रूर जाएँ अपने राष्ट्रीय संग्रहालय देखने।  वहां बहुत से सच्चे कारीगर राह देख रहे हैं अपने सामान को लेकर कब से बैठे हैं कब आएंगे मेरे देशवासी-----. मिटटी का तवा ,सुराही अद्भुत नक्कारी से सु सज्जित व् हाथ से निर्मित सूती वस्त्र ,अन्य शिल्प कला बुला रही है आपको , आओ मेरे प्यारे देशवासी ,एक बार आओ तो सही 

Saturday, February 9, 2019

नारी तुम केवल श्रद्धा हो

नारी तुम केवल श्रद्धा हो 
मार्ग अवरुद्ध उन्नति का लेकिन 
तुम दिखा सकती  हो सामर्थ्य अपनी 
यदि तुम्हे अवसर दिया जाये 
इतनी क्षमता इतना बल है 
नारी तू बहुत सबल है 
तेरी शक्ति को जग पहचानेगा 
हो चकित जय तेरी बोलेगा 
हर क्षेत्र में परचम तुझे लहराना है 
नारी शक्ति है आज ये दिखाना है 
जग को रास्ता देना ही होगा 
अपना आसमा तुझे लेना ही होगा 
प्रतिभा के लिए अवसर है ज़रूरी 
नारी को अधिकार देना होगा 
जब जब नारी को अधिकार मिले 
विकास व् उन्नति के फूल खिले 
रचा है सदैव नारी ने इतिहास 
बस निकाल दे अपने जीवन से 
एक शब्द 'काश ;...